Stree Ki Kamvasna Ko Badhane Ke Desi Upay

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स्त्री की कामवासना को बढ़ाने के देसी उपाय

स्त्री की कामशीलता-

जिस प्रकार पुरूषों मं कामवासना का अभाव की समस्या होती है, ठीक उसी प्रकार स्त्रियों में भी कामवासना का अभाव होता है, जिसे ‘स्त्री कामशीलता’ कहते हैं। ऐसी स्त्रियों में सेक्स की इच्छा नहीं होती है। संभोग के प्रति इनमें अरूचि या अनिच्छा होती है। ऐसी स्त्रियां संभोग करना नहीं चाहती अथवा संभोग में अपने पति का साथ नहीं देती हैं। यदि कई बार संभोग करती भी हैं, तो केवल पति की खुशी के लिए, ना कि अपनी मर्जी व आनंद के लिए। वह बस संभोग के दौरान ऐसा पड़ी रहती हैं कि जैसे कि मुर्दा हो। ना तो चेहरे पर ही कोई आनंद के भाव होते हैं और न ही शारीरिक गतिविधि में।

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कामशीलता की बीमारी आजकल स्त्रियों में बहुत तेजी से फैल रही है। पहले स्त्रियां स्वतंत्र रूप से इस रोग की चिकित्सा हेतु स्त्री रोग विशेषज्ञों के पास नहीं आती थीं, लेकिन आजकल स्वतंत्र रूप से भी कामशीलता की समस्या को लेकर उसके समाधान हेतु स्त्रियां स्त्री रोग विशेषज्ञों या चिकित्सकों के पास आती हैं।
मुझे स्वयं ऐसी कई स्त्रियों की चिकित्सा का अवसर प्राप्त हुआ है। आजकल जमाना बड़ा फास्ट हो गया है। पिछले एक दशक में मैंने देखा है कि कई स्त्रियां दूरभाष या(ई-मेल, मैसेज, टाॅक आदि) इंटरनेट द्वारा भी समस्याओं के समाधान हेतु मुझसे सम्पर्क किया है। पहले स्त्रियां लज्जाशील होती थीं, लेकिन अब खुलकर बातें करतीं है और बेधड़क अपनी समस्या बताती हैं। चाहे चिकित्सक पुरूष हो या स्त्री। अब चिकित्सक का पुरूष होना या स्त्री होना उनके लिए कोई मायने नहीं रखता है।

कामशीलता के लक्षण-

1. सेक्स की इच्छा न होना।

2. सेक्स के प्रति अरूचि होना

3. संभोग में पति का सहयोग न करना।

4. संभोग से हिचकिचाना या कतराना, कोई न कोई बहाना करना।

5. संभोग से घृणा होना।

6. कामेच्छा जागृत न होना।

7. पति के मैथुन प्रस्ताव का विरोध करना, इत्यादि।

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कामशीलता के दुष्परिणाम-

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1. पति-पत्नी में झगड़ा होना।

2. पति का परायी स्त्री से संबंध बनाना।

3. पति का दूसरा विवाह करना।

4. पति के द्वारा पत्नी को छोड़ दिया जाना।

5. पति का नशेड़ी हो जाना।

6. पति का शराबी हो जाना।

7. पति-पत्नी में दूरी बन जाना।

8. पति-पत्नी में न पटना।

9. पति के द्वारा पत्नी को घर से निकाल देना।

10. पति का वेश्यागामी हो जाना।

11. पति का तनाव ग्रस्त हो जाना।

12. पति का अवसाद ग्रस्त हो जाना।

कामशीलता के कारण-

कामशीलता का कोई एक विशेष कारण नहीं है। यह रोग कई कारणों से उत्पन्न हो सकती है, जैसे..
1. कोई दुर्घटना घट जाना, जैसे बलात्कार।

2. मानसिक आघात होना।

3. योनि का कष्टदायक रोग होना।

4. पति के साथ न पटना।

5. संभोग में आनंद न आना।

6. संभोग में बार-बार अतृप्त रहना।

7. पति से घृणा होना।

8. पति का शराबी होने के कारण उसके मुंह से दुर्गंध आना।

9. पति के द्वारा सताया जाना।

10. पुरूष से घृणा होना जैसे किसी पुरूष द्वारा बलात्पूर्वक संभोग किया जाने के बाद उसके मन में पुरूष के प्रति घृणा उत्पन्न हो गयी है।

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11. संभोग के प्रति मन में कोई भ्रांति होना।

12. योनि का सूखा रहना।

13. योनि का मुख छोटा होना, जिससे संभोग के समय बहुत कष्ट होता हो।

14. नापसंद पुरूष के साथ जबरदस्ती विवाह किया जाना।

15. संभोग से गर्भ ठहरने का भय मन में बना रहना।

16. संभोग से संक्रामक रोग होने का भय मन में बना रहना।

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17. योनि का तंग होना।

18. योनिशोथ होना।

19. भगोष्ठों की सूजन होना।

20. योनि में घाव होना।

21. धार्मिक कारण होना।

स्त्रियों में कामवासना उत्पन्न करने के योग-

1. सोंठ, सफेद मूसली, काली मूसली, आम के फूल, गेहूं के खूंद, अशोक की छाल प्रत्येक पांच तोला, छोटी इलायची के बीज, कस्तूरी, मोचरस, केसर, भीमसेनी काफूर प्रत्येक एक माशा, तालमखाना, ककहेया के पत्ते, कस्तूरी लता के बीज, असगन्ध नागौरी, मखाना, ताजा शतावरी, भांग के पत्ते, खशखश, अनार के फूल प्रत्येक पांच तोला।
सर्वप्रथम सख्त औषधियों को कूट-पीसकर बारीक कपड़े से छान लें। तत्पश्चात् कस्तूरी आदि बाकी बची हुई औषधियों को भी खरल करके मिला लें। 1-2 माशा की खुराक प्रतिदिन सुबह-शाम 10 ग्राम मलाई से खिलाकर ऊपर से एक पाव गर्म दूध पिला दें। इसके प्रयोग से स्त्रियों में कामवासना एवं जोश उत्पन्न होता है और उन्हें शक्ति भी प्राप्त होती है। प्रयोगकाल में तेल, अचार, खटाई, लाल मिर्च, चाट, पकौडे़ आदि का परहेज रखें।

2. सेंधा नमक, काली मिर्च, काकड़ासिंगी, हरड़, बहेड़ा, आंवला, तालीस पत्र, सफेद जीरा, जायफल, मेथी, पीपल, काला जीर, नाग केसर, सोंठ, मीठा कूठ, धनिया प्रत्येक 40 ग्राम, भांग बीज सहित धुली हुई 700 ग्राम, शहद 100 ग्राम, चीनी एक किलो तीन सौ ग्राम, घी 100 ग्राम लें।
भांग को छोड़कर शेष औषधियों को कूट-पीसकर छानकर थोड़े से घी में हल्का भून लें। भांग को छाया में सुखाकर कूट-छानकर थोड़े घी में हल्का-हल्का भूनकर दोनों को आपस में मिलाकर शेष घी, शहद एवं चीनी मिलाकर खूब दबा-दबाकर 25-25 ग्राम के लड्डू या बर्फी काट लें। सुबह या शाम को किसी भी समय एक लड्डू पाव भर गर्म दूध से लेने से स्त्रियों तथा पुरूषों की कामवासना जागृत हो जाती है।

3. अश्वगन्धारिष्ट, बलारिष्ट तथा दशमूलारिष्ट भोजन के पश्चात् रात एवं दिन में प्रत्येक एक-एक तोला मिलाकर उतना ही पानी मिलाकर पीने से स्त्रियों में कामवासना एवं उत्तेजना जागृत हो जाती है। गर्म, खट्टे पदार्थ, लाल मिर्च, तेल, अचार, चाट-पकौड़े, तले हुए पदार्थों से परहेज करें। दूध, दही, घी आदि का प्रयोग करें।

4. पीपल छोटी, लौंग, सौंठ, तेजपत्र, अजवायन, काली मिर्च, गज पीपल, अकरकरा, समुन्द्रसोख, सफेद जीरा, जावित्री, छोटी इलायची, जायफल, नागकेसर, दालचीनी प्रत्येक 25 ग्राम कूट-छान लें। तत्पश्चात् 2 किलो कौंच के बीजों की गिरी 10 किलो दूध में इतना पकायें कि खोया बन जाये। किसी कड़ाही में 250 ग्राम घी डालकर उस खोये को भूनकर लाल कर लें। इसके बाद चार किलो चीनी की चाशनी बनाकर इसमें मिलायें तथा गर्म-गर्म में ही उपरोक्त पिसी छनी औषधियां मिलकर 20-20 ग्राम के लड्डू बना लें। प्रतिदिन सुबह एक लड्डू दूध से खाने से स्त्री-पुरूष दोनों में कामदेवता का समावेश होता है।

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