Stambhan Shakti Badhane Ke Gharelu Upay

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Stambhan Shakti Badhane Ke Gharelu Upay

स्तम्भन क्या है?

स्तम्भन शब्द का अर्थ अवरोध, ठहराव तथा रूकावट है। कामशास्त्र में ‘स्तम्भन’ शब्द का अर्थ ‘वीर्य स्तम्भन’ के रूप में लिया जाता है। अर्थात् वीर्य का नियंत्रण, वीर्य स्खलन की प्रक्रिया में रोक।
संभोग के अंत में वीर्य स्खलित होना(वीर्यपात) यह स्वाभाविक क्रिया है। लेकिन संभोग के प्रारम्भ के कुछ क्षण बाद प्रारम्भ में ही या प्र्रारम्भ से पहले ही अथवा दोनों पक्ष(नायक-नायिका) में से किसी एक के अतृप्त रहते ही यदि पुरूष स्खलित हो जाये तो स्थिति चिंताजनक हो जाती है। यदि नायिका असंतुष्ट रह जाती है तो धीरे-धीरे दूरी बढ़ने लगती है। एक समय आता है जब नायिका घृणा का भाव प्रकट करती हुई संभोग प्रस्ताव को ठुकरा देती है। नायक स्वयं अपने को असमर्थ पाकर गलानि से घिरने लगता है। बराबर समस्या समाधान में घर के अंदर और बाहर खोया-खोया रहता है। भविष्य में इस समस्या का परिणाम कुछ भी होना संभव है, अतः रोग की प्रारम्भिक अवस्था से ही इस विषय पर ध्यान देना चाहिए। तत्परतापूर्वक इसस मुक्ति पानी चाहिए।

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यहां चिकित्सायें कुछ टोटके और योग दिये जा रहे हैं..

Stambhan Shakti Badhane Ke Gharelu Upay

1. जमीकन्द और तुलसी की जड़ को पान में रखकर खाने से वीर्य स्खलन नहीं होता है।

2. नील कमल और सफेद कमल की केसर, शहद एवं खाँड के साथ पीसकर नाभि पर लेप करने से लिंग कड़ा हो जाता है और मैथुन में देर लगती है।

3. सिद्ध किये हुए कुसुम के तेल में भूमिलता या शंखपुष्पी का चूर्ण मिलाकर पैरों पर लेप करने और संभोग करने से वीर्य स्खलित नहीं होता और लिंग काफी देर तक कड़ा बना रहता है।

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4. बकरे के मूत्र में इन्द्रायन की जड़ पीसकर लिंग पर 7 दिन तक प्रतिदिन लगाने से लिंग कड़ा बना रहता है।

5. यदि कमर में फिटकरी बांधकर संभोग करें तो वीर्य स्खलन शीघ्र नहीं होता है।

6. हीरा हींग को शहद में मिलाकर लिंग पर लेप करने से अधिक देर तक रूकावट रहती है।

7. करंज की पत्तियों का रस निकाल कर हाथ की हथेलियों और पैरों के तलवों पर मलने के डेढ़ दो घण्टे के बाद मैथुन करने से वीर्यपात नहीं होता है।

8. सफेद फूल वाले कनेर की जड़ पानी में घिसकर लिंग के अगले भाग पर सुपारी को छोड़कर लगायें। लगाने के 15-20 मिनट बाद धो लें। इसके बाद संभोग करने से अद्भुत रूकावट होगी।

9. मूली के बीज 50 ग्राम पीसकर मीठे तेल 200 ग्राम में मिलाकर उबालें। जब बीज जल जायें, तब छान लें। इसको प्रतिदिन लिंग पर मलें। 30-40 दिन तक मलने से लिंग में बड़ी उत्तेजना आती है।

10. अकरकरा 2 ग्राम और जंगली प्याज़ का रस 10 ग्राम मिश्रित करके लिंग पर प्रतिदिन लेप करने से लिंग कठोर हो जाता है। इसका प्रयोग कम से कम 15 दिन तक और अधिक से अधिक 21 दिन तक करें।

Stambhan Shakti Badhane Ke Gharelu Upay

11. लौंग और समन्दर फल की गिरी 1-1 नग दोनों को अच्छी प्रकार पीसकर शहद में मिलाकर प्रतिदिन लिंग पर लगाने से 21 दिन में लिंग कड़ा हो जाता है।

12. तिलों का तेल 500 ग्राम और एरण्ड की गिरी 250 ग्राम पीसकर तेल में मिलाकर पकायें। जब तेल 250 ग्राम शेष रह जाये तो छान लें। सुपारी को छोड़कर पूरे लिंग पर प्रतिदिन लगाने से 40 दिन में हस्तमैथुन से सुस्त या टेढ़ा हुआ लिंग स्वस्थ और सख्त हो जाता है। इसे प्रतिदिन रात को आधा घण्टे तक लिंग पर मलें।

13. शुद्ध हींग एक ग्राम शहद में मिला लें। एक पतली बत्ती जीरे जैसी बनाकर इस लेप में तर करके लिंग के छेद में रखें। एक घण्टे बाद मैथुन करें, वीर्य में रूकावट और आनंद आयेगा।

14. दालचीनी, तेल बराबर-बराबर मिलाकर प्रतिदिन लिंग पर मालिश करने से लिंग का सूखना एक मास में ठीक हो जाता है और लिंग पुष्ट हो जाता है।

15. हरड़ को पानी में घिसकर रसौंत के साथ लिंग पर लेप करने से लिंग के सभी दोष दूर हो जाते हैं।

16. छोटी माई का चूर्ण 2 से 4 ग्राम सुबह-शाम सेवन करने से शीघ्रपतन की शिकायत दूर हो जाती है।

17. पीपल वृक्ष के फल, मूल, छाल एवं कोपलों को पीसकर दूध में उबाल कर, शहद और शर्करा मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से बाजीकरण होता है और शीघ्रपतन की समस्या भी दूर हो जाती है।

18. शुक्र स्तम्भन के लिए सिरिस(सिरस) के फूलों का स्वरस 10 से 20 ग्राम सुबह-शाम मिश्री मिले दूध के साथ दें।

19. समुद्रशोष के बीज 3 से 6 ग्राम जल में मिला लें। लुआबदार होने पर मिश्री के साथ घोंटकर सुबह-शाम सेवन करने से वीर्य का स्तम्भन होता है।

20. गोंद कतीरा चूर्ण 1 से 2 चम्मच रात को सोते समय पानी में भिगो दें। सवेरे मिश्री या शक्कर मिलाकर शर्बत की भांति प्रतिदिन घोंटकर प्रयोग करें। वीर्य की मात्रा, गाढ़ापन और स्तम्भन शक्ति में वृद्धि होती है और पुरूषत्व की प्राप्ति होती है।

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