Sambhog Ka Tarika

0

Sambhog Ka Tarika

संभोग का तरीका

मानसिक तनाव और संभोग-

Sexual Intercourse, Sex Timing Medicine, Sambhog, Sex Ki Jankari, Satisfying Sex

मानसिक तनाव और संभोग में गहरा संबंध है। दोनों अन्योन्याश्रित रूप में एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। मानसिक तनाव संभोग को बदमजा बना देता है। यदि तनाव के मूल में कोई यौन संबंधी समस्या हुई, तो परिस्थिति और भी जटिल एवं गंभीर हो जाती है। कुछ में तो कामेच्छा ही समाप्त हो जाती है। पुरूषों में नपुंसकता और स्त्रियों में कामशीलता की भ्रांति एवं आशंका से ग्रस्त लोग अधिकांश इसी वर्ग में आते हैं। ये संभोग के दौरान अपने पार्टनर के सामने भले ही आत्मसमर्पण कर दें, पर आनंद रंच मात्र भी नहीं उठा पाते। बल्कि इनका तनाव और भी बढ़ जाता है।

आप यह हिंदी लेख Chetanonline.com पर पढ़ रहे हैं..

दूसरे वर्ग में वे पुरूष आते हैं, जो अपने कामकाज या व्यवासाय में अत्यधिक व्यस्त रहने के कारण हमेशा जल्दी में और तनावग्रस्त रहते हैं। उनके पास परिवार के लिए कोई समय नहीं होता। कभी-कभी वे अपनी तनावग्रस्तता, उलझन, बेचैनी एवं थकावट से छुटकारा पाने या फिर बोरियत मिटाने के लिए संभोग का सहारा लेते हैं। उनका संभोग बेमन का अधकचरा शारीरिक संभोग होता है। आये और स्त्री को अन्य बेजान भोग्य वस्तुओं के समान सामने रखा, यंत्रवत् घर्षण किया, गिराया और उठ खड़े हुए। इसे भी जल्दी से निबटा दिया।

ऐसे ही लोग आगे चलकर अनेकानेक प्रकार की यौन समस्याओं से पीड़ित होकर अंदर-ही-अंदर घुटते रहते हैं और अपने जीवन को नरक समान बना देते हैं। पत्नी तो बेचारी होती है, उसकी यौन समस्याओं से इन्हें क्या लेना-देना। अनेक केसों में देखा गया है, जो यौन रोगी अच्छी से अच्छी औषधियों का सेवन करके भी लाभान्वित नहीं हुए वे मात्र मानसोपचार द्वारा तनावमुक्त हो जाने पर प्राकृत यौन जीवन का आनंद लेने में समर्थ हो गए।

यह भी पढ़ें- धात रोग

Sambhog Ka Tarika

दूसरी ओर कामेच्छा का दमन और असफल संभोग, मानसिक तनाव को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। अनेकानेक कारणों से विवाह की उम्र आगे भागती जा रही है। कितने ही युवक और युवतियां परिपक्वता को प्राप्त कर लेने के बाद भी प्राकृत संभोग के सुअवसरों के अनुपलब्ध रहने के कारण तनावग्रस्त हो यौन विमार्गन अथवा विवाह पूर्व या विवाहोतर संभोगों का सहारा लेने को विवश हो रहे हैं। ऐसे में उन्हें थोड़ी बहुत राहत भले ही मिलती हो, पर आत्मग्लानि और अपराध बोध उनके तनाव में और भी वृद्धि करते हैं। दूसरी ओर यौन समस्याओं से ग्रस्त लोग सफल संभोग का आनंद नहीं उठा पाते तथा नपुंसक, शीघ्रपतन से ग्रस्त, यौन संबंधी गलत धारणाओं एवं अंधविश्वासों से ग्रस्त आदि होकर जीवन बर्बाद करने पर उतारू हो जाते हैं। इसका सबसे बड़ा परिणाम औरतों को भोगना पड़ता है। ऐसे पुरूषों को स्त्रियों की काम-तृप्ति, सुख व आनंद की कोई चिंता व परवाह नहीं रहती। उन्हें तो बस अपनी संतुष्टि से सरोकार रहता है। स्त्री को दबोचा और अपनी भड़ास शांत करके अलग हो गये, बस इतना ही फर्ज समझते हैं।

एक सर्वे में कई विवाहिता एवं बाल-बच्चेदार स्त्रियां ऐसी भी निकलीं, जिन्होंने कभी जाना ही नहीं, कि संभोग में चरमसुख नाम की भी कोई चीज होती है।

ऐसे ही एक सर्वे में स्त्रियों ने पुरूषों के संबंध में जो अपनी भावनायें व अनुभव व्यक्त किए, उनमें से मात्र बानगी के लिए कुछ को नीचे प्रस्तुत किया जा रहा है..
अनुभव..1
“पत्नी हूं, इसलिए पति को तन से समर्पित होना केवल एक मजबूरी भर है मेरे लिए। अन्यथा आज तक मैंने कभी जाना ही नहीं कि संभोग में कोई सुख, मजा व आनंद नाम की चिड़िया होती भी है कि नहीं।”

अनुभव.. 2
“वे सदा उतावले और बहुत आतुर रहते हैं ‘मिलन’ के लिए, इसलिए जब भी मौका हाथ लगता है उनके, वे मुझे बांहों में जकड़ लेते हैं और मुझसे अपेक्षा रखते हैं कि मैं भी उन्हीं तरह हमेशा तैयार रहूं और उनके सुखोपभोग में बराबर की सहभागी बनूं। यह भला कैसे हो सकता है। वे आये ‘काम’ निकाला और चल दिये। मैं छत ताकती रह जाती हूं। देर तक नींद नहीं आती। सोचती हूं कि क्या सभी मर्द ऐसे ही होते हैं, मतलबी..।”

अनुभव.. 3
”जहां उनके हाथ मेरे स्तनों की ओर बढ़े नहीं कि मैं समझ जाती हूं कि अब मुझे उत्तेजित करने के लिए वे क्या करने वाले हैं। इसके अलावा वे कोई दूसरा तरीका जानते ही नहीं। मैं तो उनकी इस आदत से बोर हो गई हूं।”

Sambhog Ka Tarika

Sambhog Ka Tarika

अनुभव.. 4
”संभोगकाल में ज्यादातर मशीन की तरह लगातार घिसते चले जाते हैं और हर बार अपेक्षा रखते हैं कि मैं भी उनके साथ ही साथ चरम सीमा पर पहुँचूं। वे तब तक नहीं रूकते, जब तक मैं उनसे पीछा छुड़ाने के लिए चरम सीमा तक पहुंच जाने का अभिनय नहीं करती।”

ये अतृप्ति, असंतोष और पुरूष वर्ग की स्वार्थपरता के प्रति विरोध के स्वर बिरले ही फूट पाते हैं। अधिकांश स्त्रियां तो घुट-घुट कर ही रह जाती हैं और संभोग में असंतुष्टि को ही अपना भाग्य मानने को विवश हो जाती हैं। धार्मिक रूढ़ियां, अज्ञान, अशिक्षा और अंधविश्वास उन्हें इस प्रकार का दयनीय जीवन जीने को विवश कर देते हैं।

कामोद्दीपन से उत्पन्न उत्तेजना रूपी अतिरिक्त शक्ति का सफल संभोग द्वारा ही निष्कासन होता है। इससे शरीर शिथिल और मन शांत हो जाता है। दोनों ही सहभागी अपने आप में एक ताजगी और सुखानुभूति का अनुभव करते हैं। जब यह उत्तेजना अपने स्वाभाविक मार्ग से नहीं निकल पाती और शरीर में संचित होती जाती है, तो अन्ततोगत्वा समग्र मनोदैहिक तन्त्र को तनाव की स्थिति में ला देती है। दमन जितना ही अधिक होता है, तनाव उसी अनुपात में बढ़ता जाता है। जिस प्रकार इंजन के ब्वायलर में तैयार होने वाली भाप रूपी अतिरिक्त शक्ति का यदि समय≤ पर सेफ्टी वाल्व द्वारा निष्कासन न होता रहे, तो वह ब्वायलर को फाड़ सकती है। उसी प्रकार प्राणी के अंदर दमित ‘काम’ की अतिरिक्त उत्तेजना उसके व्यक्तित्व को तहस-नहस कर सकती है। जब उसे निष्कासन का सही मार्ग नहीं मिलता, तो वह यौन विमार्गन, यौन दुराचार, व्यभिचार, मनो विकार(यथा दुश्चिन्ता, दुर्भीति, हिस्टीरिया, न्यूरिस्थीनिया आदि) अक्षमताओं असमर्थताओं(यथा नपुंसकता, कामशीलता, योनि आकर्ष आदि) का रूप धारण कर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बाहर आने लगती है।

अतः स्पष्ट है कि मानसिक तनाव और संभोग में गहरा संबंध है। दोनों एक-दूसरे को घनिष्ठरूप में प्रभावित करते हैं। कामोद्दीपन से उत्पन्न तनाव के प्रशमन का एकमात्र सही मार्ग सफल संभोग ही है। हमारे लिए आवश्यक है कि हम जीवन में ‘काम’(सेक्स, संभोग) को उसके महत्व को स्वीकारें। उसे उचित मान्यता दें।

सेक्स समस्या से संबंधित अन्य जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें..http://chetanclinic.com/

Summary
Review Date
Reviewed Item
Sambhog Ka Tarika
Author Rating
51star1star1star1star1star

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *