Premika Se Baat Karu To Bhi Virya Jata Hai

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Premika Se Baat Karu To Bhi Virya Jata Hai

प्रेमिका से बात करूं तो भी वीर्य जाता है

प्रश्न : सर! मेरी समस्या यह है कि मुझमें कामुकता और अधीरता इतनी है कि जब भी मैं फोन पर या फिर प्रत्यक्ष रूप से अपनी प्र्रेमिका से रूबरू बात करता हूं, तो मेरा वीर्य जरा-जरा करके स्वतः ही निष्कासित होने लगता है। इसी कारण मैं अंदर से बहुत कमजोरी महसूस करने लगा हूं। यहां तक कि मेरा वजन भी बहुत कम हो गया है। हर वक्त तनाव में रहता हूं, जिस कारण पढ़ाई में भी मेरा मन बिल्कुल नहीं लग पाता है। भविष्य को लेकर चिंतित हूं, मार्ग दर्शन करें।

उत्तर : सबसे पहले तो आपको घबराने या चिंता करने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है, क्योंकि आपने ये जो भी बातें बताई हैं, यब सब आम प्रक्रिया है, जोकि एक उम्र में होना स्वाभाविक है। हर इंसान के जीवन में कभी न कभी ऐसा दौर या मोड़ आता है, जब उसे इस अनुभव से गुजरना ही पड़ता है।

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Premika Se Baat Karu To Bhi Virya Jata Hai

यहां मैं आपके प्रश्न का उत्तर एक उदाहरण के साथ देना चाहूंगा, ताकि आपको मेरी बात स्पष्ट हो जाये। मान लीजिए आप मीठे के शौकीन हैं और ऐसे में अगर आपके सामने आपकी कोई पसंदीदा मिष्ठान परोस दिया जाये या फिर देसी घी में बना हुआ गरमा गरम मीठा हलुवा दे दिया जाये, तो क्या होगा। आपके मुंह से भी लार टपकने लगेगी। बल्कि मैं तो कहूंगा कि अगर आपको मीठा खाने की तीव्र इच्छा हो रही हो, तो ऐसे स्थिति में किसी मिष्ठान या मीठे आहार का नाम लेने मात्र से ही आपके मुंह में पानी आ जायेगा। तो अब आप ही बताइए कि क्या इस स्थिति में भी आप इसे कोई रोग या समस्या मानेंगे?

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ठीक इसी प्रकार की स्थिति आपके साथ भी है। जब आप युवा हो रहे होते हैं, तो विपरीत लिंग की ओर आकर्षित होना स्वाभाविक होता है। पुरूष का स्त्री की ओर और स्त्री का पुरूष की ओर सेक्सुअल रूप से आकर्षित होना कोई गंभीर बात नहीं, बल्कि सामान्य प्रक्रिया है। इसी क्रम में जब आप किसी स्त्री के साथ बहुत ज्यादा दिमागी रूप से सेक्सुअली जुड़ाव रखते हैं, तो आपके गुप्तांग से पानी जैसा द्रव्य टपकने लगता है।

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और हां, यह द्रव्य वीर्य नहीं होता है। यह जो द्रव्य या लार होती है, यह पुरूष के गुप्तांग में अंदर की दीवार पर एकत्र होती है और इसका मुख्य कार्य होता है पुरूष के वीर्य को मूत्र एसिड के प्रभाव से बचाना। यानी जब वीर्य निष्कासित हो, तो मूत्र के एसिडिक इफेक्ट को क्षीण करना ही इस द्रव्य का कार्य होता है। अगर साईंस की भाषा में कहा जाये, तो यह यूरेथ्रल ग्लैंड व प्रोस्टेट ग्रंथि का बहाव है। इसे रोग न समझें। यह तो एक काॅमन एक्टिविटी है। इसके लिए नाहक चिंता करने व इलाज की कोई आवश्यकता नहीं है।

दूसरी बात आपने कही कि आप शारीरिक रूप से बहुत कमजोरी महसूस करने लगे हैं, वजन भी घट गया है और आप अपनी पढ़ाई पर भी ध्यान केन्द्रित नहीं कर पा रहे हैं। तो सर्वप्रथम मैं आपके इस मिथ्या भ्रम को दूर करना चाहूंगा। ये जो भी समस्यायें आपने बताईं, इन सब बातों की मूल वजह है आपका बहुत ज्यादा तनावग्रस्त रहना। अधिक मात्रा में स्ट्रेस(तनाव) लेने के कारण आप इन समस्याओं से घिरे हुए हैं।
दरअसल इस समस्या की मुख्य जड़ ही यही है कि अधिकतर लोग इस गलतफहमी में जीते हैं या फिर उनका ऐसा मानना होता है कि वीर्य(स्पर्म) की बबार्दी मतलब जीवन की बर्बादी और जीवन की बर्बादी मतलब सर्वनाश। जबकि इसका वास्तविकता से दूर-दूर तक कई वास्ता नहीं है। ये सब ऊलुल-जुलूल मन-गढ़ंत बातें हैं।

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और जैसे कि मैंने पहले भी बताया कि लार जो टपकती है, वह वीर्य नहीं होता, इसलिए आप भी निश्चिंत रहिए। आपके गुप्तांग से जो द्रव्य स्राव होता है, वह स्पर्म नहीं है। जब इस बात को आप अपने दिल-दिमाग में भली-भांति बैठा लेंगे और आपको पूर्ण विश्वास हो जायेगा कि आपके वीर्य की बर्बादी नहीं हो रही है, तब आप स्वयं ही शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ महसूस करने लगेंगे और धीरे-धीरे आप अपनी इस समस्या से पूरी तरह छुटकारा पा सकेंगे। वजन भी खुद-ब-खुद सही हो जायेगा और पढ़ाई पर भी आप अपना पूरा ध्यान केन्द्रित कर पायेंगे, ये मैं आपको पूर्ण विश्वास के साथ कहता हूं, इसलिए खुश रहिए, स्वस्थ रहिए।

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