Napunsakta Ka Permanent Ilaj

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Napunsakta Ka Permanent Ilaj

नपुंसकता का परमानेंट इलाज

नामर्दी, नपुंसकता 

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आज के आधुनिक दौर में जिंदगी की भागम-भाग इतनी तेज हो गई है कि उसकी रफ्तार के आगे व्यक्ति की अपनी जिंदगी की गाड़ी बहुत पीछे छूटती जा रही है। समय के अभाव के कारण व्यक्ति अपने खानपान और स्वास्थ्य की ओर से लापरवाह होता जा रहा है। जिस कारण अनेक शारीरिक रोग से व्यक्ति घिरता जा रहा है।
यह तो रही स्वास्थ्य से संबंधित बातें। लेकिन आज के दौर में पति-पत्नी के रिश्ते में जो सबसे बड़ी परेशानी बनकर सामने आ रही है, वो है पुरूषों का गुप्त रोग। यूं तो गुप्त रोग के अंतर्गत बहुत-सी समस्यायें होती हैं, लेकिन यहां हम जो बात करने वाले हैं वो है सबसे बड़ी समस्या ‘इम्पोटेन्सी’ यानी नामर्दी व नपुंसकता।
जी हां, पाठकों। बचपन की गलतियों के कारण, जवानी की भूल में या फिर बुरी संगति के कारण व्यक्ति अपनी सेक्सुअल लाइफ को जाने-अन्जाने खराब कर लेता है, जिसका परिणाम कभी-कभी नपुंसकता जैसी भयानक बीमारी के रूप में सामने आती है।

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क्या होती है नपुंसकता?

Napunsakta Ka Permanent Ilaj

नपुंसकता कह लो या फिर नामर्दी, दोनों एक ही समस्या के अलग-अलग नाम हैं। इस समस्या में पुरूष, स्त्री के साथ संभोग करने के लायक नहीं रहता है। शादी से पहले हो या बाद में, जब कभी ऐसा अवसर आता है कि पुरूष को स्त्री के साथ संभोगरत होना पड़ता है, तो उस दौरान उसके लिंग में पूर्ण उत्तेजना आती ही नहीं। और यदि आ भी जाये, तो लिंग प्रवेश कराते ही पुनः शिथिल हो जाता है। जिस कारण व्यक्ति संभोग नहीं कर पाता और स्त्री-पुरूष दोनों असंतुष्ट रह जाते हैं। विशेषकर स्त्री को बहुत क्रोध आने लगता है, क्योंकि नपुंसकता में पुरूष, स्त्री को उत्तेजित तो कर देता है, लेकिन उसकी उत्तेजना को शांत करने में पूरी तरह असमर्थ रहता है। जिस कारण स्त्री, पुरूष से घृणा करने लगती है।
पुरूष भी स्त्रियों से दूरी बनाने लगते हैं। उन्हें पत्नी के सामने शर्मिन्दा होना पड़ता है। धीरे-धीरे व्यक्ति में खुद के प्रति हीनभावना इतनी बढ़ जाती है कि उसमें आत्मविश्वास की कमी हो जाती है।
कुल मिलाकर नपुंसकता की स्थिति बहुत ही भयानक सिद्ध हो सकती है। इसलिए बुरी आदतों, बुरी संगत और अनियमित दैनिकचर्या का त्याग करना आवश्यक है, तभी नपुंसकता से बचाव संभव है। अन्यथा उपचार भी निरर्थक साबित होता है।

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नपुंसकता से छुटकारा पाने का आयुर्वेदिक इलाज-

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1. योग- ककहिया की जड़, कौंच के बीज, बरियारा की जड़, शतावर, गोखरू और तालमखाना प्रत्येक 50-50 ग्राम।
विधि- उपर्युक्त सभी औषधियाँ एकत्र कर कूट-पीसकर छान लें।
सेवन विधि- 6 ग्राम दूध के साथ सेवन करने का निर्देश दें। इस औषधि को प्रातःकाल सेवन करायें। गाय के दूध के साथ सेवन करना हितकर है।
लाभ- यह औषधि नामर्दी से पीड़ित व्यक्ति को सेवन कराने से नपुंसकता दूर हो जाती है। इसके अलावा प्रमेह रोग और स्वप्नदोष में भी आराम मिलता है।

2. योग- गुलमुंडी, सिंघाड़ा, कमरकस, तालमखाना, सरबाली, गोंद बबूल, गोंद सेमल, उड़द की दाल, बीजबंद, शतावर, शकाकुल मिश्री, मोचरस, इमली बीज की गिरी, बबूल के फूल और धाय के फूल प्रत्येक 15-15 ग्राम। चीनी उपरोक्त सभी औषधियों के बराबर।
विधि- उपरोक्त सभी औषधियों को एकत्र करें और कूट-पीसकर छान लें और साफ-सुथरी काँच की शीशी में भरकर रख लें।
सेवन विधि- आवश्यकता एवं रोग की तीव्रता अनुसार 10 से 15 ग्राम चूर्ण गाय के दूध के साथ प्रातःकाल प्रतिदिन एक बार दें।
लाभ- इसके सेवन से धातु क्षीणता, स्वप्नदोष, नपुंसकता का नाश होता है और व्यक्ति को स्वस्थ व पूर्ण मर्द महसूस करता है।

3. योग- पाषाणभेद, मुलेहठी, सत गिलोय, शिलाजीत, बंशलोचन, छोटी इलायची के बीज, तालमखाना और कुश्ता कलई प्रत्येक 15-15 ग्राम। श्वेत मिश्री उपरोक्त सभी औषधियों के बराबर।
विधि- ये सभी औषधियाँ एकत्र कर भली-भाँति कूट-पीसकर एक जान कर लें और छान कर एक साफ-सुथरी काँच की शीशी में भरकर बंद कर दें।
लाभ- यह चूर्ण बहुत उपयोगी, असरकारक एवं श्रेष्ठ प्रभाव उत्पन्न कर वीर्य प्रमेह को नष्ट कर देता है। वीर्य प्रमेह नष्ट हो जाने के उपरान्त रोगी और अधिक बलवान और हृष्ट-पुष्ट हो जाता है। यह चूर्ण 10 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन 1-2 बार अथवा आवश्यकतानुसार दूध के साथ सेवन करने के लिए दिया जाता है।

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4. योग- सफेद मूसली, स्याह मूसली, तवाखीर, सफेद जीरा, स्याह जीरा, धनिया, कमल गट्टे की गिरी, काली मिर्च, लौंग, सफेद चन्दन, छोटी इलायची के बीज, चिरौंजी, छुहारा, बादाम, सौंठ, तज, तेजपात, पीपर, नागरमोथा, कौंच के बीज की गिरी तथा शतावर प्रत्येक 20 ग्राम, मिश्री एक किलो भार।
विधि- उपर्युक्त सभी औषधियाँ एकत्र करें। उसके पश्चात् उन सभी को कूट-पीसकर छान लें और महीन पिसी हुई मिश्री में मिलाकर एक जान करके एक साफ-सुथरी काँच की बोतल में बंद करके रख लें।
सेवन विधि- 10 ग्राम प्रातःकाल सेवन करने के उपरान्त ऊपर से गाय का दूध पीने का निर्देश दें। इसकी प्रभाव शक्ति प्रबल शक्तिप्रद होती है।
लाभ- यह चूर्ण अति उत्तम फलदायक होता है। इसके प्रभाव से वीर्य प्रमेह नष्ट हो जाता है। वीर्य प्रमेह नष्ट हो जाने से रोगी का बल बढ़ने लगता है।

5. योग- बिना बीज वाली बबूल की फली 12 ग्राम, बीज बंद 3 ग्राम, तालमखाना 6 ग्राम, मिश्री 42 ग्राम।
विधि- सभी औषधियों को कूट-पीसकर भली-भाँति छान लें और एक साफ सुथरी शीशी में भरकर रख लें। प्रातःकाल 6 ग्राम चूर्ण सेवन करने के बाद गाय का दूध पीने का निर्देश दें।

लाभ- यह वीर्य प्रमेह नष्ट कर रोगी को बलवान बना देने वाला गुणकारी योग है।

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