Namardi Ki Pehchan

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Namardi Ki Pehchan

नामर्दी की पहचान

नपुंसकता और इसके प्रकार :

Napunsakta, Impotence, Impotence Causes, Namardi Ka Ilaj

पुंसक यानी पौरूषत्व से भरपूर अर्थात् मैथुन में बलवान पुरूष और नपुंसक यानी पौरूषत्व न होना या मैथुन में मर्दाना जोश(ताकत) न हो ऐसा पुरूष। संक्षेप में यदि वयस्क पुरूष किसी वयस्क स्त्री के साथ अपन इन्द्रिय(लिंग) से संतोषप्रद संभोग(मैथुन) करने में पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से असमर्थ(कमजोर या असफल) हो, तो उसे ‘नपुंसक’ कहते हैं। यानि पुरूष का अपनी लैंगिक ताकत से स्त्री के साथ पूर्ण रूप से संभोग न कर सकने की कमजोरी को ही नपुंसकता या नामर्दी कहते हैं। प्रायः नपुंसक पुरूष में उसके शिश्न की उत्थान की शक्ति अत्यधिक घट जाती है, जिससे वह स्त्री से मैथुन क्रिया संतुष्टि पूर्वक नहीं कर पाता।

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नपुंसकता के कारण-

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खट्टे पदार्थों का अधिक प्रयोग करना, विरूद्ध भोजन, कच्चा अन्न खाना, देर से पचने वाला अन्न खाना, अनूप देशों के पशुओं का मांस खाना, कम आयु की कन्या से योग करना, गुदा मैथुन, रजस्वला के साथ मैथुन करना, मद्यपान व नशा करके मैथुन करना, जानवरों के साथ मैथुन करना, हस्तमैथुन, लिंग में चोट लगना, लिंग को मोटा व लम्बाई बढ़ाने हेतु हानिकारक लेप लगाने से नपुंसकता आना, वीर्य का दूषित होना, आयु की नपुंसकता आदि।

अभी तक नपुंसकता यानी यौन अक्षमता के कारणों की चर्चा हुई, अब इसके प्रकारों तथा उन्हें दूर करने के उपायों को समझें-

आंशिक नपुंसकता-

जब शिश्न में तनाव पूरी तरह नहीं हो पाता अथवा सहवास पूर्व या तुरन्त बाद तनाव समाप्त हो जाता हो।

अस्थाई नपुंसकता-

जब मानसिक कारणों से नपुंसकता पैदा हो जाती है, यदि इन कारणों को दूर कर लिया जाता है, तब यह नपुंसकता खुद-ब-खुद दूर हो जाती है। अधिकांश युवक जो मन से अपने को नपुंसक मान बैठते हैं, वे इसी तरह की नपुंसकता से ग्रस्त होते हैं। उनकी भावनात्मक स्थिति को सुधार कर संभोगक्षमता वापस लाई जा सकती है।

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स्थायी नपुंसकता-

जब शिश्नोत्थान में सहयोगी पेशियां अपनी क्षमता खा बैठती हैं, तब स्थायी नपुंसकता की स्थिति बन सकती है। वैसे ऐसे मामले बहुत कम होते हैं।

पूर्ण नपुंसकता-

जब शिश्न का उत्थान पूर्णतः लुप्त रहता है, तब उस स्थिति में व्यक्ति को पूर्ण नपुंसकता की श्रेणी में गिना जा सकता है।

शारीरिक नपुंसकता-

प्रौढ़ावस्था के बाद जब हार्मोन का स्त्राव कम होता जाये, तब कामेच्छा में कमी के साथ-साथ यौन क्षमता भी घटने लगती है। वैसे यदि व्यक्ति चाहे तो वह स्वास्थ्य के नियमों का पालन और संयम से हार्मोन का स्त्राव लंबी आयु तक सामान्य बनाये रख सकता है।

आपेक्षिक नपुंसकता-

किसी स्त्री से एक बार सफलतापूर्वक संभोग कर लेना, लेकिन बाद में नहीं कर पाना। अपनी पत्नी के साथ सफलतापूर्वक सहवास कर लेना, लेकिन अन्य के साथ नहीं कर पाना या इसके विपरीत स्थिति होना आदि। यह आपेक्षिक नपुंसकता मानी जा सकती है। इसे मानसिक नपुंसकता का ही एक रूप भी मान सकते हैं।

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मानसिक नपुंसकता-

साथी के समीप जाते ही उसकी अप्रिय बातों, मुंह की बदबू, अपान वायु छूटने, मलिनता आदि कई कारण हो सकते हैं, जिससे मानसिक रूप से वह संभोग के लिए तैयार नहीं हो पाता। कई युवक हस्तमैथुन, स्वप्नदोष से यह भ्रम पाल लेते हैं कि वे मैथुन योग्य नहीं रहे। ऐसे युवा आत्मविश्वासी नहीं होते। यदि आत्मविश्वास, दृढ़ इच्छाशक्ति रखें, तब यह नपुंसकता सहज ही दूर हो जाती है।
यदि इन कारणों को दृढ़ इच्छा शक्ति से दूर कर दिया जाये, तब व्यक्ति नपुंसकता के घेरे से निकल कर पौरूषशक्ति से भरपूर हो सकता है।

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