Marriage Sex Life

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Marriage Sex Life

मैरिज सेक्स लाइफ

वैवाहिक जीवन और यौन तृप्ति

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विवाह की सफलता या असफलता इस बात पर निर्भर करती है कि पति-पत्नी दोनों सेक्स के बारे में कितनी समझ व जानकारी रखते हैं। सेक्स कहें, संभोग कहें या फिर पति-पत्नी का शारीरिक मिलन कहें, इसकी पहली शुरूआत व नींव सुहागरात वाली मधुर बेला को ही पड़ जाती है। पहली रात को शुरू हुआ ‘शारीरिक मिलन’ सिलसिला फिर आजीवन तक दोनों की सहमति से चलता रहता है, जोकि दोनों की आवश्यकता भी बन जाती है।

वैसे देखा जाये तो कामेच्छायें बहुत ही लचीली होती हैं, इन्हें जब जैसा चाहें, वैसा बना सकते हैं। महीने में कितनी बार यौन संबंध बनायेंगे, इसका कार्यक्रम यदि पति-पत्नी मिलकर ‘मासिक रूपरेखा’ के आधार पर बनायेंगे तो पहले से इसकी तन और मन से तैयारी करने से संभोग को अधिक आनंददायक बनाया जा सकता है। लेकिन नवदम्पत्तियों में ऐसी रूपरेखा बना पाना आसान नहीं होता, क्योंकि कब दिल मचल उठे कुछ कहा नहीं जा सकता।

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जब व्यक्ति संभोग के बारे में सोचना शुरू करता है, तब मन में आनंद की तरंगें उठने लगती हैं, क्योंकि मन का विचारों से गहरा संबंध होता है। मन के माध्यम से विचार सम्पूर्ण शरीर में फैल जाते हैं, फिर शरीर से मन की ओर जाने लगते हैं।

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विचारों से मस्तिष्क, तंत्रिकाओं को सक्रिय कर देता है। तंत्रिकायें, मस्तिष्क के आदेश पर यौनांगों की ओर रक्तप्रवाह शुरू कर देती हैं, नतीजन यौनांग फूलकर अकड़ जाते हैं। उनसे जुड़ी तंत्रिकायें, मस्तिष्क को आनंद का संदेश भेजने लगती हैं, इससे आनंद की अनुभूति का एक क्रम-सा बन जाता है।

यही अनुभूति उसमें एक जोश भर देती है। कामोद्दीपन की स्थिति में दिल की धड़कनें बढ़ जाती हैं, रक्तचाप बढ़ जाता है। पुरूष का शिश्न भी दण्डायमान होकर अकड़ जाता है, तनाव में आ जाता है। इस स्थिति में स्त्री का भग-शिश्न भी अकड़ जाता है। इसकी लंबाई भी बढ़ जाती है। योनि के होंठ भी फैल जाते हैं और योनि की बारथेलिन ग्रंथियां एक विशेष प्रकार का तरल पदार्थ छोड़ने लगती हैं।

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कामोत्तेजना का प्रभाव स्त्री शरीर के अन्य अंगों पर भी पड़ता है। उसके निप्पल्स(स्तन के अग्रभाग) में भी तनाव उत्पन्न हो जाता है। पूरे शरीर में आनंद की लहरें उठने लगती हैं, जिसमें वह पति से संभोग कराने के लिए बेचैन हो जाती है। इसी समय जब स्त्री-पुरूष परस्पर आपस में विभिन्न प्रकार की यौनिक-क्रीड़ायें जैसे- चुम्बन, मर्दन आदि करते हैं तो स्त्री की सांसें भी तेज हो जाती हैं। स्त्री की योनि और पुरूष का शिश्न विशेष प्रकार के तरल पदार्थ छोड़ते हैं, जिससे योनि का सूखापन दूर हो जाता है, जो शिश्न की रगड़ से योनि को क्षतिग्रस्त होने से बचाता है। इसके साथ ही शिश्न से निकला क्षारीय प्रकृति का स्त्राव यानि की अम्लता को नष्ट करके शुक्राणुओं की रक्षा का बंदोबस्त कर देता है।

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