Ling Chota Aur Patla Hone Ka Ayurvedic Upay

Published by: 0

Ling Chota Aur Patla Hone Ka Ayurvedic Upay

लिंग छोटा और पतला होने का आयुर्वेदिक उपाय

शिश्न छोटा या पतला होने की आयुर्वेदिक चिकित्सा-

कई पुरूष ऐसे होते हैं जो शिश्न छोटा या पतला होने के कारण हीनभावना से ग्रस्त हो जाते हैं। ऐसे पुरूष, स्त्री के पास जाने से भय और संकोच करने लगते हैं। वास्तव में शिश्न का आकार छोटा होना या पतला होना कोई मायने नहीं रखता। शिश्न छोटा हो या पतला इसका महत्व नहीं है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। महत्व है- मैथुन शक्ति का। मैथुन शक्ति जितनी प्रबलता से सम्पन्न होगी- स्त्री उतनी ही संतुष्ट होती है। स्वयं पुरूष को भी तृप्ति प्राप्त हो जाती है। शिश्न में भरपूर कठोरता तथा स्तंम्भन शक्ति के बल पर ही यौन आनंद एवं तृप्ति निर्भर है। छोटे या पतले शिश्न से नहीं। छोटा या पतला शिश्न भी यदि पूर्ण कठोर हो तो मैथुन आनंद उतना ही प्राप्त होता है, जितना बड़े तथा मोटे शिश्न से नहीं। छोटा या पतला शिश्न भी यदि पूर्ण कठोर हो तो मैथुन आनंद उतना ही प्राप्त होता है, जितना बड़े तथा मोटे शिश्न से। छोटे तथा पतले शिश्न को बड़ा कठोर, स्तम्भन शक्ति से युक्त तथा मोटा बनाने की अति उपयोगी आयुर्वेदिक चिकित्सा नीचे सविस्तार प्रस्तुत की जा रही है। इनमें से कोई भी एक योग पीड़ित रोगी को सेवन करने का निर्देश दें।

आप यह आर्टिकल पर पढ़ रहे हैं..

1. योग- शतावर 50 ग्राम, तोदरी छोटी 25 ग्राम, सफेद मूसली 50 ग्राम, जायफल 12.5 ग्राम, मिश्री 50 ग्राम, सौंठ 12.5 ग्राम, काली मूसली 50 ग्राम, इन्द्रयव 12.5 ग्राम, सालम मिश्री 50 ग्राम, सुखारी बीज 12.5 ग्राम, बहमन सुर्खलाल 25 ग्राम, जावित्री 12.5 ग्राम, सफेद बहमन 25 ग्राम, कुलंजन 12.5 ग्राम, तोदरी बड़ी 25 ग्राम।
विधि- उपर्युक्त समस्त औषधियाँ एकत्र करें। सभी को कूट-पीसकर एक जान चूर्ण करके कपड़छान कर लें और एक पेंचदार ढक्कन लगी साफ-सुथरी काँच की शुद्ध शीशी में भरकर रख लें। यह चूर्ण अतिशय गुणकारी सिद्ध है। यह चूर्ण अति शक्तिशाली प्रभावयुक्त होता है। इसका असर तीव्र गति से होता है। यह शिश्न की वृद्धि कर शिश्न को कठोर, मोटा तथा लम्बा कर देता है। इसके सेवन से कामशक्ति बढ़ती है। रोगी बलवीर्य से परिपूर्ण शक्तिशाली हो जाता है। यह योग स्तम्भनशक्ति को बढ़ा देता है, जिससे आशातीत आनंद एवं तृप्ति की प्राप्ति होती है। 6 ग्राम चूर्ण में 12 ग्राम मधु मिलाकर सेवन करने का निर्देश दें। ऊपर से दूध पीने की सलाह भी दें। दूध पीने से अधिक लाभ की आशा की जा सकती है।

Ling Chota Aur Patla Hone Ka Ayurvedic Upay

2. योग- सूखे आँवों का कपड़छान चूर्ण 2 ग्राम, स्वर्णयुक्त योगेन्द्र रस 125 मि.ग्रा. तालमखाना चूर्ण 2 ग्राम, त्रिबंग भस्म 125 मि.ग्रा.।
विधि- यह एक मात्रा है। उपर्युक्त योग अति उत्तम फलदायक सिद्ध है।
लाभ- इसके सेवन से पतला शिश्न मोटा हो जाता है। नपुंसकता-नामर्दी पर भी आशातीत प्रभाव पड़ता है और रोगी मैथुन आनंद एवं तृप्ति प्राप्त करता है। यह स्तम्भन शक्ति बढ़ाने वाला योग भी है। यह योग दिन में 2 बार सुबह-शाम सेवन करने का निर्देश दें। इससे बल-वीर्य बढ़ता है। बलवीर्य बढ़ने से रोगी कांतिवान हो जाता है। इस योग की औषधियों को एकत्र खरल कर मधु के साथ मिलाकर सेवन कराया जाता है। सेवन के बाद दूध पीने की सलाह भी दें।

यह भी पढ़ें- संभोग

3. योग- छोटी इलायची का चूर्ण 2 ग्राम, लौंग का चूर्ण 1 ग्राम, बंग भस्म 250 मि.ग्रा., पीपर चूर्ण 1 ग्राम।
विधि- यह योग सर्वोत्तम शक्तिप्रद एवं उच्चकोटि का प्रभाव उत्पन्न कर छोटे शिश्न में आशातीत बढ़ोत्तरी करता है। इसके अलावा यह योग नपुंसकता नाशक भी है। वीर्य बढ़ाने में भी यह सहायक सिद्ध होता है। वीर्य गाढ़ा हो जाता है, जिससे रोगी की स्तंभन शक्ति भी विकसित होने लगती है। वीर्य के तमाम दोष इस योग के सेवन से दूर हो जाते हैं।
सेवन विधि- ऊपर लिखी कई औषधियों की यह एक मात्रा है। ऐसी 1-1 मात्रा दिन में 2 बार सुबह-शाम मधु के साथ सेवन करने का निर्देश दें। सेवन के बाद ऊपर से दूध पीने की सलाह देने से आशातीत लाभ शीघ्रता से होने लगता है। यह बलवीर्य-कांति बढ़ाने वाला गुणकारी योग है।

4. योग- जायफल 6 ग्राम, तिल 12 ग्राम, जावित्री 6 ग्राम, शहद 25 ग्राम, अकरकरा 6 ग्राम, बिनौलों की गिरी 12 ग्राम, अरण्ड के बीज 12 ग्राम, कड़वा कूट 6 ग्राम, पुराना गुड़ 12 ग्राम, पुराना नारियल 12 ग्राम।
विधि- यह योग अति उपयोगी, असरकारक एवं श्रेष्ठ लाभ प्रदान करता है। उपरोक्त समस्त औषधियाँ घोंट-पीसकर एक जान कर लें और एक पोटली बना लें। उसके पश्चात् बकरी का थोड़ा-सा दूध गर्म करके पोटली को उसमें डालकर भीगने दें। जब पोटली भीग जाये, तब आहिस्ता-आहिस्ता शिश्न पर सेंक करें। शिश्न के अग्र भाग मुण्ड अर्थात् सुपारी पर कदापि सेंक नहीं करनी चाहिए। इस सिंकाई से शिश्न की माँसपेशियों की सुस्ती दूर हो जाती है। पतला शिश्न मोटा तथा छोटा शिश्न धीरे-धीरे बड़ा होने लगता है। इस पोटली के प्रयोग से शिश्न के अंदर आश्चर्यजनक उत्थान एवं उत्तेजना-शक्ति का संचार भी होने लगता है।

5. योग- अश्वगंधा 1 कैप्सूल, शिलाजीत 1 कैप्सूल।
विधि- उपर्युक्त दोनों कैप्सूल दिन में 2-3 बार अथवा आवश्कतानुसार सेवन करायें। यह कैप्सूल बल-वीर्यवर्धक गुण सम्पन्न है। इनके सेवन से शिश्न का पतलापन तथा शिश्न का छोटापन दोनों दूर हो जाते हैं। शिश्न पर्याप्त शक्तिशाली, सुदृढ़ तथा बलवान हो जाता है। रोगी को मैथुन तृप्ति प्राप्त होती है।

6. योग- अश्वगंधारिष्ट 15 एम.एल, बलारिष्ट 15 एम.एल.।
विधि- दोनों कैप्सूल सेवन करने के अतिरिक्त भोजन करने के बाद उपरोक्त दोनों पेय सेवन करने का निर्देश दें। कैप्सूल तथा पेय सेवन कराने से पीड़ित रोगी मानसिक, शारीरिक ताकि स्नायुविक तौर पर भी शक्तिशाली हो जाता है। शिश्न में भी आशातीत शक्ति एवं जोश का संचार हो जाता है।

यह भी पढ़ें- स्वप्नदोष

7. योग- शिलाजीत 12 ग्राम, प्रवाल भस्म 18 ग्राम, भीमसेनी कर्पूर 13 ग्राम, चाँदी के वर्क 12 ग्राम, बंग भस्म 12 ग्राम, गुड़ुची सत्व 18 ग्राम।
विधि- सभी औषधियाँ प्राप्त करें और खरल करके खूब घोट-पीसकर एक जान कर लें। उसके पश्चात् 125 मि.ग्रा. शक्ति की गोलियों का निर्माण कर गोलियाँ छाया में सुखाकर किसी स्वच्छ साफ-सुथरी ढक्कन युक्त काँच की बोतल या शीशी मंे भरकर रख लें। 1-1 गोली दिन में 2 बार अथवा आवश्यकतानुसार सेवन करने का निर्देश देने से आशातीत लाभ प्राप्त होता है। अति तीव्र अवस्था होने पर 2-2 गोली दिन में 2 बार अथवा आवश्यकतानुसार दें।
लाभ- यह नपुंसकता-नामर्दी को नष्ट करने वाला योग है। इसका प्रभाव शिश्न पर भी पड़ता है तथा छोटा-पतला शिश्न बड़ा तथा शक्तिशाली मोटा भी होने लगता है। रोगी की शक्ति बढ़ जाने पर रोगी के चेहरे पर रौनक एवं कांति उत्पन्न हो जाती है। दूध के साथ प्रयोग कराना अधिक हितकर साबित होता है।

Ling Chota Aur Patla Hone Ka Ayurvedic Upay

8. योग- मूसली पाक 6 ग्राम, फलकल्याण घृत 3 ग्राम, स्पे. च्यवनप्राश 12 ग्राम।
विधि- उपर्युक्त तीनों औषधियाँ अतिशय गुणकारी होती हैं। इसका प्रभाव सर्वोत्तम शक्तिदायक तथा उच्चकोटि का ध्वजभंग नाशक होता है। इन तीनों औषधियों को एक साथ मिलाकर एक मात्रा बनाये। यह 1-1 मात्रा दिन में 2 बार अथवा आवश्यकतानुसार सेवन करने का निर्देश देने से पीड़ित रोगी को आशातीत लाभ हो जाता है। यह योग नपुंसकतानाशक अपूर्व शक्ति प्रदान करने वाला है। इसके सेवन से शिश्न भी कठोर तथा सबल होने लगता है, जिससे शिश्न का पतलापन तथा शिश्न के छोटेपन के विकार भी दूर हो जाते हैं।

9. योग- तालमखाना, सेमल मूसली, गोखरू, शतावर, केवांच के बीच की मींगी, गुल सकरी और तथा बरियार के बीज प्रत्येक 60-60 ग्राम।
विधि- सभी औषधियाँ एकत्र करें और अति सूक्ष्म बारीक पीसकर एक जान कर लें। पीसने के पश्चात् कपड़छान करें और आवश्यकतानुसार मिश्री का महीन चूर्ण मिलाकर पेंचदार ढक्कनयुक्त एक काँच की शीशी में भरकर रख लें। यह चूर्ण 6 से 10 ग्राम दिन में 2 बार अथवा आवयकतानुसार सेवन करने का निर्देश दें। गाय के दूध के साथ सेवन कराना हितकर सिद्ध होता है। यह योग अपूर्व शक्ति प्रदान करता है। इसके सेवन से नपुंसकता नष्ट हो जाती है। शिश्न की दुर्बलता का भी अंत हो जाता है। यह शिश्न को सबल, मजबूत, और शक्तिशाली बना देने वाला योग है। इस औषधि के सेवन से पतला शिश्न मोटा तथा छोटा शिश्न लंबा हो जाता है। यह छोटे अण्डकोष को भी बढ़ाकर सामान्य कर देता है। यौवन प्रदाता हाॅरमोन्स का स्राव भी इस योग से बढ़ने लगता हैं।

सेक्स समस्या से संबंधित अन्य जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें..http://chetanonline.com/

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *