Likoria Ka Desi Ilaj

0

Likoria Ka Desi Ilaj

ल्यूकोरिया का देसी इलाज

श्वेत प्रदर(ल्यूकोरिया)

Leukorrhea, Leucorrhoea Causes, Leucorrhoea Symptoms

महिलाओं को होने वाली यौनिक समस्या ‘सफेद पानी आना’, यह ऐसी समस्या है, जिसमें उन्हें कोई विशेष दर्द व तकलीफ नहीं होती है, केवल यौन-मार्ग से श्वेत रंग का चिपचिपा लेसुनमा द्रव्य बहता रहता है।

श्वेत प्रदर या ल्यूकोरिया को अनेक बीमारियों का एक लक्षण माना गया है। खून की कमी, आंतों की सूजन और गर्भाशय का बाहर निकलना आदि बामारियों में श्वेत प्रदर रहता है। यह बीमारी उस समय उभर आती है, जब स्वास्थ्यप्रद नियमों का ख्याल न करने से पेशाब का संक्रमण हो जाता है। यौनांगों की साफ-सफाई की तरफ ध्यान न देने तथा शरीर को जरूरी पोषक न मिल पाने से भी ल्यूकोरिया की शिकायत उत्पन्न हो जाती है।

आप यह हिंदी लेख Chetanonline.com पर पढ़ रहे हैं..

यदि स्त्रियों की योनि से रिस रहे सफेद पानी की जांच करा ली जाये, तब उस कारण का आसानी से पता लग सकता है, जिससे ल्यूकोरिया की शिकायत पैदा हुई है। पेशाब की जांच-पस सेल्स व शुगर का स्तर मालूम करने के लिए और खून की जांच-हीमोग्लोबिन, रक्त शर्करा व वी डी आरस्ल(यौन रोग की जांच) आदि की जांचे करानी चाहिए। इसके अलावा मल की जांच भी करानी चाहिए। इन जांचों से रोग की तह तक पहुंचा जा सकता है।

महिलाओं में श्वेत प्रदर बहुतायत से फैला हुआ रोग है। जिस तरह से घुन, अनाज के दानों को अंदर ही अंदर खोखला कर डालता है, ठीक उसी प्रकार सफेद पानी की समस्या भी स्त्री को अंदर से कमजोर व खोखल कर डालती है। महिलाओं में यह रोग व्यापकता से फैला हुआ है। प्रायः 13 से 30 साल की उम्र में यह रोग ज्यादा असर दिखाता है।

श्वेत प्रदर में योनि-मार्ग से सफेद अथवा कुछ पीलापन लिए हुए या मटमैला-सा चिपचिपा रिवास होता है। यह रिसाव दुर्गन्धयुक्त भी हो सकता है और नहीं भी। आम बोलचाल की भाषा में इसे पानी आना, श्वेत प्रदर या औरतों की धात गिरना कहते हैं। हकीम लोग इसे ‘सैनालुर्रहम’ कहते हैं, जबकि अंग्रेजी में ल्यूकोरिया नाम बहुत प्रसिद्ध है।

यह भी पढ़ें- स्वप्नदोष

कैसे पनप जाता है यह रोग?
कुछ खास कारण ये हैं-

ल्यूकोरिया का देसी इलाज

मधुमेह, गर्भाशय में सूजन, योनिशोथ, मलावरोध, थायराइड और पिट्यूटरी ग्रंथियों के स्त्रावों में कमीवेशी, एन्टीबायोटिक औषधियों का अधिक सेवन, योनि संक्रमण, अप्राकृतिक मैथुन, आंतों की सूजन, खून की कमी आदि।

सामान्य कारण-

तनावयुक्त दिनचर्या, फास्टफूड का अधिकता से सेवन, तेज मिर्च-मसालों का अधिक सेवन, अत्यधिक संभोग करना, पेडू व योनि प्रदेश पर आघात, अधिक सन्तानोत्पत्ति, क्रोध, द्वेष, बढ़ता प्रदूषण, शारीरिक स्वच्छता का अभाव विशेषतौर पर योनि तथा उसके आसपास आदि।

क्या लक्षण हैं?

श्वेत प्रदर होने पर योनि मार्ग से पीलापन लिए हुए सफेद पानी का रिसाव लगातार होता रहता है, इस रिसाव की मात्रा कम-अधिक होती रहती है। किसी-किसी को स्त्राव की वजह से योनि में खुजली और जलन की शिकायत भी होती है। इस रोग में उदर के निचले हिस्से में भारीपन, बैठकर उठने और चलने पर जांघों में भारीपन और दर्द। बदहजमी, कब्ज़, भोजन में अरूचि, चिड़चिड़ापन, आंखों के आगे अंधेरा छा जाना, अंगों में ऐंठन, सिर में दर्द, भूख न लगना, चक्कर आना, कमर दर्द, बार-बार पेशाब जाने की शिकायत आदि लक्षण कामोवेश उभरते हैं, जिनकी तीव्रता माहवारी के समय बढ़ जाती है।

श्वेत प्रदर का इलाज-

आयुर्वेद में कई नुस्खे हैं, जिनसे श्वेत प्रदर की चिकित्सा की जाती है। इस रोग की चिकित्सा को दो भागों में बांटा जा सकता है- (1.) स्थानीय या बाहरी, (2.) आभ्यान्तर चिकित्सा।
रोग का निदान हो जाने पर सबसे पहले रोग का कारण जानन जरूरी है, फिर उन कारणों को दूर करना चाहिए। जो महिलायें खट्टे, मिर्च मसालेदार भोजन करती हैं, अचार, आलू, बैंगन, प्याज का सेवन करती हैं, उन्हें इनका त्याग करके सुपाच्य तथा हरी सब्जियों से युक्त भोजन करना चाहिए। उचित दिनचर्या अपनानी चाहिए।

यह भी पढ़ें- शीघ्रपतन

1. स्थानीय चिकित्सा-

Likoria Ka Desi Ilaj

श्वेत प्रदर का एक महत्वपूर्ण कारण यौनांगों का अस्वच्छ रहना है, अतः चिकित्सा में सबसे पहले यौनांगों की साफ-सफाई पर पूरा ध्यान देना चाहिए। स्थानीय चिकित्सा में योनि प्रक्षालन के उपायों का प्रयोग बताया जाता है, इस हेतु निम्न प्रयोग सफल हैं।
स्नान से पहले एक टब में गुनगुना पानी भरकर 10 ग्राम बोरिक पाउडर डालकर मिलायें, फिर उस टब में पैर बाहर लटका कर बैठें। इस उपाय से योनि की अस्वच्छता दूर होने के साथ पेडू का सेक भी हो जाता है।

Likoria Ka Desi Ilaj

मौलसिरी का 100 ग्राम छाल का डेढ़ लीटर पानी में उबालें। एक लीटर पानी शेष रहने पर छान लें और छने पानी में 5 ग्राम फिटकरी का चूर्ण मिला दें। अब इस पानी से पिचकारी की सहायता से योनि का प्रक्षालन करें।

दिन में दो बार टीनेजा योग(सनातन) की एक चम्मच(छोटी) मात्रा आधा लीटर पानी में डालकर उबाल कर जब पानी सुहाता-सुहाता रह जाये, तब योनि प्रक्षालन(धोना-डूश) करें।

2. आभ्यान्तर चिकित्सा-

विधारा 10 ग्राम, लोघ्र 10 ग्राम एवं मिश्री 20 ग्राम। तीनों को कूट-पीसकर छान लें। इस चूर्ण की 5-5 ग्राम मात्रा सुबह-शाम सादा पानी या ठंडे दूध से दें।

बड़ी इलायची और माजूफल दोनों का समान मात्रा में कपड़छन चूर्ण करके इस चूर्ण के बराबर मिश्री पीसकर मिला दें।
इस चूर्ण की 3-3 ग्राम मात्रा सुबह-शाम ठण्डे पानी से दें।

सेक्स समस्या से संबंधित अन्य जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें..http://chetanclinic.com/

Summary
Review Date
Reviewed Item
Likoria Ka Desi Ilaj
Author Rating
41star1star1star1stargray

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *