Hastmaithun Sahi Ya Galat?

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Hastmaithun Sahi Ya Galat

हस्तमैथुन सही या गलत?

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वास्तविक यौन समागम के अतिरिक्त अन्य जिन साधनों से स्त्री या पुरूष की कामोत्तेजना बढ़कर चरम उत्कर्ष(या स्खलन) प्राप्त हो जाये, वे समस्त उपाय हस्तमैथुन की परिभाषा के अन्तर्गत आ जाते हैं। यदि हम पुरूषों की बात करें तो विवाह पूर्व यौवनावस्था में अधिकांश युवा हस्तमैथुन करके बढ़ी हुई कामवासना को शांत करते हैं।

सेक्स के पहलुओं में सबसे अधिक भ्रान्ति उत्पन्न करने वाला हस्तमैथुन ही है, जिसे लोग अपनी-अपनी समझ से देखकर तरह-तरह के निष्कर्ष निकालते हैं, जिससे जन-साधारण यह नहीं समझ पाता कि वास्तव में यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। यह जानने के लिए कि हस्तमैथुन हानिरहित है या हानिकारक इसके पक्ष व विपक्ष में दिये गये तर्कों को वैज्ञानिक आधार पर परखा जाना चाहिए, ताकि धुंध छट जाये और असलियत सामने आ जाये।

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Hastmaithun Sahi Ya Galat

आगे बढ़ने से पहले हम अपने पाठकों से यही कहना चाहेंगे कि हर चीज व घटना के दो पहलू होते हैं, एक सही और एक गलत। यही बात हस्तमैथुन पर भी लागू होती है। अगर हस्तमैथुन के नुकसान हैं, तो इसके कुछ फायदे होना भी स्वभाविक है।

अब प्रश्न यह भी उठता है, कि जिन्हें हम नुकसान के तौर पर देखते हैं, क्या वाकई में हस्तमैथुन से वो नुकसान व्यक्ति को होता है? इस हिंदी लेख में हम यही चर्चा करने वाले हैं कि जिन्हें हम हस्तमैथुन से होने वाले नुकसान की श्रेणी में गिनते हैं, वास्तव में ऐसा होता नहीं है।

हस्तमैथुन के विरूद्ध दलीलें : –

1. यह क्रिया अप्राकृतिक है।

2. यह मानसिक अपरिपक्वता का लक्षण है।

3. हस्तमैथुन से नपुंसकता बढ़ती है।

4. हस्तमैथुन से कमजोरी और थकावट आती है।

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दलीलों की समीक्षा :-

उपरोक्त दी गई दलीलों में कहां तक दम है या फिर सच्चाई है, इसकी समीक्षा के बाद ही यह कह पाना संभव हो सकेगा कि हस्तमैथुन हानिकारक है या नहीं। यद्यपि नुकसानदायक न होना सिद्ध करने के लिए कुछ ठोस दलीलें देने की आवश्यकता होगी।

(1.) हस्तमैथुन अप्राकृतिक है?
इसका उत्तर प्रकृति के अतिरिक्त और कौन दे सकता है। 14-15 वर्ष के होते ही कामोत्तेजना होने लगती है, जबकि विवाह की उम्र पुरूषों के लिए 21 वर्ष व लड़कियों के लिए 18 वर्ष रखी गई है। यद्यपि आजकल युवतियों का भी 25 वर्ष तक विवाह हो पाता है और पुरूषों का 30 वर्ष के आसपास। चूंकि प्राकृतिक रूप से कामोत्तेजना उठती है, इस कारण इसको अनदेखा नहीं किया जा सकता है। और व्यक्ति विशेष के पास यही विकल्प रह जाता है कि या तो वह हस्तमैथुन करे या वेश्यागमन या बलात्कार अथवा समलैंगिक संबंध बनाये। हस्तमैथुन को छोड़कर बाकी तीनों न केवल अप्राकृतिक ही हैं, बल्कि अनैतिक और अपराध भी है, जिससे सजा भी हो सकती है। हस्तमैथुन ही केवल एक मात्रा विकल्प रह जाता है, जिसे क्योंकर अप्राकृतिक कहा जा सकता है, जबकि यह केवल व्यक्ति विशेष तक ही सीमित है और इसके करने से किसी अन्य से विवाह के पूर्व कोई यौन संबंध भी स्थापित नहीं होता।

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(2.) हस्तमैथुन- मानसिक अपरिपक्वता का लक्षण :
कुछ लोगों का यह कहना है कि अनपढ़, पिछड़े, गंवार व अविकसित व्यक्ति ही हस्तमैथुन करते हैं। यह उनके पिछड़ेपन को दर्शाता है। यह कथन न तो तर्क संगत है और न ही न्याय संगत।

हस्तमैथुन करते समय मस्तिष्क तरह-तरह की काल्पनिक उड़ान लेता है, जो तभी संभव है, जब मस्तिष्क कम से कम सामान्य कार्यक्षमता वाला अवश्य हो। यह देखने में आया है कि यदि व्यक्ति विशेष कोई गहरा अध्ययन या प्रशिक्षण ले रहा हो तो ऐसी स्थिति में कामोत्तेजना दबाने के विस्फोटक परिणाम हो सकते हैं जैसे:-

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(क.) रात्रि में स्वप्नदोष हो सकता है।
(ख.) कामोत्तेजना शांत करने के लिए व्यक्ति विशेष वेश्या के पास जा सकता है, जिससे लैंगिक बीमारियां उत्पन्न हो सकती हैं।
(ग.) वह समलिंगी बन सकता है।
(घ.) उसका मस्तिष्क इस बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है कि वह बलात्कार भी कर सकता है।

(3.) हस्तमैथुन नपुंसकता को बढ़ावा देता है?
यह लांछन गलत है, क्योंकि सहवास की तरह हस्तमैथुन भी धीरे-धीरे उत्तेजना बढ़ाते हुए वीर्य स्खलन की स्टेज पर पहुंचा देता है, जिससे वीर्य स्खलन करते समय चरमसुख की प्राप्ति होती है। यदि सहवास क्रिया में वीर्य स्खलन हानिकारक नहीं समझा जाता, तो हस्तमैथुन में वीर्य स्खलन हानिकारक कैसे समझा जा सकता है।

(4.) हस्तमैथुन से कमजोरी और थकावट?
पुराने समय से चली आ रही मिथ्या धारणा है कि 40 बूंद खून से एक बूंद वीर्य बनता है, जिसको हस्तमैथुन द्वारा नष्ट करना घोर अपराध है। यही भावना मनुष्य के अन्तर्मन को दुःखी करती रहती है। जब-जब वह हस्तमैथुन करता है और यह घसकन व अपराध की भावना थकान व कमजोरी का कारण बन जाता है। हस्तमैथुन क्रिया में व्यक्ति विशेष को इतना अधिक श्रम नहीं करना पड़ता कि उसे कमजोरी व थकान महसूस हो।
यह भी धारणा जैविक आधार पर गलत साबित हो गई है कि वीर्य खून से बनता है। वास्तव में टेस्टोस्टेरोन हारमोन ही शुक्राणुओं को अंडकोष में सृजन करने में सहायता करते हैं। यदि मनुष्य हस्तमैथुन न भी करे तो इसकी अधिकता होने से वीर्य द्वारा अवश्य स्खलित हो जायेंगे।

इन सभी तथ्यों को समझने के बाद यह बात कही जा सकती है कि हस्तमैथुन बुरा नहीं है, बशर्ते यह कभी-कभी किया जाये और इसकी आदत न बनायी जाये। अति किसी भी चीज की सही नहीं होती है, चाहे वह भोजन ही क्यों न हो।

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