Dhat Girna

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Dhat Girna

धात गिरना!

मूत्र में वीर्य का जाना(शुक्रमेह), धात रोग

Spermatorrhoea, Penis Infection, Dhat Ki Dawa, Dhat Syndrome

यह आम बोलचाल की भाषा में धात रोग या धातु-स्राव के नाम से प्रचलित है। इसमें अनैच्छिक वीर्यस्त्राव होता है। किसी सुंदर स्त्री को देख लिया या किसी सुंदर स्त्री का स्पर्श हो गया या शरीर टकरा गया या कोई कामुक व अश्लील फिल्म देखते समय या कामुक वार्तालाप करते समय वीर्यपात हो गया। मल-मूत्र त्याग करते समय थोड़ा जोर लगा देने पर मूत्र मार्ग से चिकना स्त्राव निकल जाता है। यह रोग बाद में विवाहित जीवन में शीघ्रपतन में परिवर्तित होते हुए देखा जाता है।

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धात रोग के मुख्य कारण-

1. स्वप्न में कुछ उत्तेजक दृश्य, जैसे सुंदर स्त्री के नग्न अंग-प्रत्यंगों को देखने से या फिर खुद को संभोग करते हुए देखकर आई उत्तेजना से अनैच्छिक रूप से वीर्यपात होना।

2. तंत्रिका तंत्र के कमजोर हो जाने से।

3. अधिक परिश्रम वाला कार्य करने से, जिससे थकान हो और शारीरिक कमजोरी के कारण।

4. किसी लंबे समय से चले आ रहे रोग के कारण दवायें लेते रहने से।

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5. पुरूषांग की चमड़ी के सख्त हो जाने की वजह से।

6. अश्लील साहित्य पढ़ने व पोर्न देखने के कारण।

भोजन से पहले चिकित्सा-

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1. रसायन चूर्ण, अश्वगंधा चूर्ण व शतावरी चूर्ण 1-1 चम्मच दिन में 3 बार जल से लें।

2. चन्द्रप्रभा वटी – 500 मिग्रा, बंग भस्म – 250 मिग्रा, गिलोय सत्व – 500 मिग्रा, प्रवाल पिष्टी – 250 मिग्रा। ऐसी 1 मात्रा दिन में 2 बार शहद से लें।

3. चन्दनासव 4-4 ग्राम दिन में 2 बार भोजन से पहले बराबर मात्रा में जल मिलाकर लें।

4. उदरामृतशंख योग 1-1 चम्मच 2 बार भोजन से पहले।

Sperm Comes Out After Urine

5. त्रिफला चूर्ण व ईसबगोल भूसी 1-1 चम्मच रात में सादे जल से लें।

धात गिरने के पीछे एक मुख्य कारण वीर्य का पतलापन भी हो सकता है, इसलिए वीर्य विकार और वीर्य को गाढ़ा करने का उपचार भी आवश्यक है।

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वीर्य का पतलापन दूर करें और पायें वीर्य विकार से छुटकारा-

1. वीर्यशोधन वटी – 250 मिग्रा, कामचूड़ामणि रस – 125 मिग्रा, शतावरी चूर्ण – 1 ग्राम, कौंचा चूर्ण (शुद्ध) – 1 ग्राम, तालमखाना चूर्ण – 1 ग्राम, सफेद मूसली चूर्ण – 1 ग्राम।
ऐसी 1 मात्रा दिन में 2 बार सुबह-शाम दूध से लें।

2. रसायन चूर्ण 1-1 चम्मच दिन में 2 बार जल से लें।

3. अश्वगंधारिष्ट 4-4 चम्मच दिन में 2 बार भोजन से पहले बराबर भाग जल मिलाकर लें।

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