भागदौड़ भरी जिंदगी और दुःखी विवाहित जीवन tension in sex life

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आज के भागदौड़ वाले समय में तरह-तरह के रोग व कमज़ोरियां पनपने का मुख्य कारण यह है कि आज लोगों को अपने शरीर की तरफ ध्यान देने की फुर्सत ही नहीं है। नौजवानों को उनकी भागदौड़ और विवाहित पुरुषों को रोज़-रोज़ के घरेलू कामकाज व मानसिक तनावों ने उनकी कुदरती पुरुषत्व शक्ति को खोखला बनाकर उन्हें जवानी की उम्र में ही बूढ़ा बना दिया है। आज हर छोटे-बड़े शहर व कस्बों के क्लिनिकों, अस्पतालों व मैडिकल स्टोरों पर बढ़ती भीड़ इस बात का पक्का सबूत है। क्योंकि आज हमारी दिनचर्या, रहन-सहन व खान-पान के तरीके भी वह नहीं हैं, जो होने चाहिए। आज लोग सुबह उठते ही खान-पान के सही नियमों का उल्लंघन शुरु कर देते हैं और सुबह की चाय बिस्तर पर ही बिना कुल्ला किए मुँह में पैदा हुए अनगिनत कीटाणुओं के साथ पेट में उतार लेते हैं। दिन भर भागते-दौड़ते हुए फास्ट फूड और कृत्रिम रसायनों द्वारा बने कोल्ड ड्रिंक्स आदि से चटखारे लेते हुए अपना पेट भरते रहते हैं। आधुनिकता के नाम पर लोगों में कई बुरी आदतों, विचारों व तरह-तरह के नशों का चलन बढ़ रहा है। ऐसी स्थिति में वे फिर उम्मीद करते हैं कि हम कमज़ोर न हो, यह कैसे संभव हो सकता है। एक सर्वेक्षण के अनुसार आज दस में से सात पुरुष, स्त्री मिलन के समय में सैक्स की पराजय को झेलकर मानसिक तनावों से घिरे रहते हैं लेकिन फिर भी वे अपनी मर्दानी शक्ति की झूठी शान के लिए सैक्स की कमजोरी व पराजय को छिपाते रहते हैं। जिससे उनकी समस्या नामर्दी के द्वार तक पहुँच जाती है और नतीजे में उनकी घर-गृहस्थी व खुशहाल विवाहित जीवन के सोचे हुए सारे सपने टूट कर बिखर जाते हैं। लेकिन समस्या है तो समाधान भी।

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