पहला मिलन सुहागरात First Night

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पति-पत्नी का पहला मिलन उनके विवाहित जीवन का पहला दरवाजा खुलने की तरह है और इस दरवाजे को पार करने के लिए पति-पत्नी दोनों को ही बड़ी समझ व धैर्य से काम लेना चाहिए क्योंकि सुहागरात मर्द शक्ति की पहली परीक्षा होती है और इस परीक्षा की घड़ी में जरा सी असावधानी से पूरी जिन्दगी में गांठ लग जाती है जो खुशहाल विवाहित जीवन के लिए अच्छी बात नहीं होती क्योंकि किसी भी कारण से पति-पत्नी का टूटा हुआ दिल फिर से जुड़ना संभव नहीं हो पाता। पहले मिलन की रात पति-पत्नी के बीच पहला परिचय कराती है और उस समय उन दोनों का परिचय कराने वाला कोई अन्य व्यक्ति भी मौजूद नहीं होता बल्कि पति-पत्नी को आपस में ही समझ कर एक दूसरे के दिल मे अपनी जगह और प्यार बनाना पड़ता है यही प्यार उनके सारे जीवन के लिए स्थायी बन जाता है। पहले मिलन में पुरूष को अपनी पत्नी के सामने भूल कर भी किसी अन्य स्त्राी के रूप के गुणों की चर्चा नहीं करनी चाहिए क्योंकि स्त्राी की सबसे बड़ी कमजोरी होती है कि वह अपने सामने किसी दूसरी औरत की प्रशंसा सहन नहीं कर पाती। वह अपने पति से केवल अपनी ही प्रशंसा सुनना चाहती है क्योंकि स्त्रिायां अधिकतर इष्र्यालु स्वभाव की होती हैं। आप पहले मिलन में अपनी पत्नी की जितनी प्रशंसा करेंगे उतनी ही जल्दी वह आपके व्यवहार पर मुग्ध होकर सर्वस्य आपके हवाले कर देगी लेकिन पुरूष को भी ऐसी स्थिति में जल्दबाजी से काम नहीं लेना चाहिए बल्कि धैर्य व संयम से धीरे-धीरे अलिंगन तथा चुम्बन आदि क्रिया के द्वारा आगे बढ़े क्योंकि प्रथम संभोग में स्त्राी को थोड़ा कष्ट होता है अतः पुरूष को स्त्राी के होने वाले कष्ट का भी ध्यान रखना चाहिए। अपने प्यार से पत्नी को होने वाले कष्ट की झिझक दूर करके ही पहली सीढ़ी पर चढें जिससे आपकी पत्नी के मन में आपके प्रति एक सच्चे हमदर्द पति की छवि बनेगी इसके विपरीत यदि आप अपने मन पर काबू न पाकर कामेच्छा के वशी भूत होकर जल्दबाजी में सहवास करने लगेंगे तो पत्नी के मन में आप केवल कामुक और स्वार्थी पति बनकर रह जायेगें। उसके मन में मधुर विवाहित जीवन का संजोया हुआ सपना बिखर जायेगा। पति-पत्नी सुखी विवाहित जीवन की गाड़ी के दो पहिए होते है। उन पहियों के ताल-मेल से ही विवाहित जीवन का सारा सफर सुख शान्ति से पूरा होता है। पहले मिलन की रात वो रात होती है जिसकी यादगार पूरी जिन्दगी के लिए एक दूसरे के मन में अमिट छाप छोड़ती है, यही यादगार उनके खुशहाल विवाहित जीवन की नींव बन जाती है। कुछ अज्ञानी पति अपने मन में यह धारणा बना लेते हैं कि पहले मिलन की रात में संभोग द्वारा पत्नी के गुप्तांग से खून आना जरूरी है जो उसके कौमार्य की सच्ची पहचान होती है लेकिन आज की स्थिति और माहौल के बदलाव में यह सोचना बिलकुल गलत है। कुदरत ने लड़की की योनि के अन्दर एक झिल्ली का निर्माण किया हुआ होता है कुछ लड़कियों की यह झिल्ली बहुत सख्त होती है तथा कुछ लड़कियों की झिल्ली बहुत कोमल व पतली होती है तो शादी से पहले ही खेल कूद में या साईकिल आदि चलाने अथवा बसों में चढ़ते-उतरते चोट लगने से फट जाती है। ऐसी स्थिति में पहले संभोग में खून आने का प्रश्न ही नहीं होता। इसके विपरीत जिनकी झिल्ली सख्त होती है वह पहले मिलन में संभोग में आघात प्रतिघात के द्वारा फटती है जिससे गुप्तांग से खून आने लगता है। आज की तेज रफ्तार जिन्दगी की व्ययस्तता में सत्तर प्रतिशत लड़कियों के झिल्ली शादी से पहले ही फट जाती है। इसका मतलब यह नहीं है कि वह अपना कौमार्य खो चुकी है तथा चरित्राहीन है। तीस प्रतिशत लड़कियों की झिल्ली सख्त होने पर वे केवल संभोग द्वारा ही फटती है और उसे संभोग में बहुत कष्ट उठाना पड़ता है। पति को चाहिए कि वह ऐसी गलत धारणा को अपने मन से निकाल दे कि पहले मिलन के संभोग में पत्नी की योनि से खून आना जरूरी है।

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